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Mahoba dalit cook case of insulting

Mahoba: दलित रसोईया मामले में कानूनी कार्रवाई न होने पर बसपा में आक्रोश, प्रदर्शन की दी चेतावनी

महोबा के सरकारी विद्यालय में प्रधानाध्यापिका द्वारा दलित रसोईया के साथ छुआछूत और भेदभाव से आहत पीड़िता 15 दिनों से न्याय पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर है। मगर दलित प्रकरण में जल्द कार्रवाई का दावा करने वाली यूपी पुलिस के दावे महोबा में बेसर साबित हो रहे हैं। जिसको लेकर आज बहुजन समाज पार्टी में भी इस घटना को लेकर आक्रोश पनप रहा है। बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने पीड़िता के साथ एसपी से मुलाकात की है और आरोपी प्रधानाध्यापिका पर आपत्तिजनक शब्दो और अपमानित के साथ-साथ उसके पति पर राजीनामा न करने पर धमकाने जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने पर कार्यवाही की मांग की है।

दरअसल पूरा मामला कुलपहाड़ थाना अंतर्गत आने वाले कटवरिया प्राथमिक विद्यालय का है। जहां पर सरकारी विद्यालय में शिक्षा के नाम पर प्रधानाध्यापिका द्वारा बच्चों में जहरीली मानसिकता का पाठ पढ़ाया जा रहा था। जिसकी शिकार स्कूल के मिड डे मील में काम करने वाली एक दलित रसोईया हो गई। जिसको प्रधानाध्यापिका द्वारा लंबे समय से अपमानित करने के साथ-साथ जातिसूचक शब्दों तथा बच्चों को दलित रसोईया के हाथ का खाना ना खाने की गंदी मानसिकता की शिक्षा दी जा रही थी।

बता दें कि, विधवा दलित महिला गीता अहिरवार बीते कई सालों से सरकारी स्कूल में मिड डे मील में बच्चों का खाना बनाती चली आ रही है। बीते कुछ समय से इस स्कूल की प्रधानाध्यापिका नीलू गुप्ता द्वारा दलित रसोईया को सरेआम बच्चों के सामने अभद्रता कर अपमानित किया गया। यहीं नहीं आरोप है कि, बच्चों से दलित रसोईया के हाथ का बना खाना ना खाने की बात कहकर उसे अपमानित करना, तो कभी दलित रसोईया को जाति सूचक शब्दों से बच्चों के सामने अपमानित करना, इस प्रधानाध्यापिका की आम बात हो गई। नफरत की सोच से आहत दलित रसोईया फूट-फूट कर अपना दुखड़ा सबको सुनाने लगी।

दलित रसोईया ने अधिकारीयों को आपबीती सुनाई, मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि पूर्व में डीएम मृदुल चौधरी ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए बीएसए को कार्यवाही के निर्देश दिए थे, जिस पर आरोपी प्रधानचार्य को निलंबित कर दिया। मगर उस पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की गई। पीड़िता कानूनी कार्रवाई के लिए अभी भी अधिकारीयों के चक्कर लगा रही है। मगर पीड़िता को न्याय नहीं मिल ला रहा है। पीड़िता का आरोप है कि, मामले में डीएम से शिकायत करने से बौखलाए प्रधानचार्य के पति विष्णु गुप्ता ने भी राजीनामा के लिए धमकाया, तभी से पीड़िता न्याय और सुरक्षा की गुहार लगा रही है।

तहरीर देने के 15 दिन बाद भी महोबा पुलिस हाथ पर हाथ रखकर बैठी हुई है। दलित प्रकरण में तुरंत कार्रवाई का दावा करने वाली यूपी पुलिस के दावे जनपद महोबा के इस दलित प्रकरण मामले में खोखले साबित हो रहे हैं। न्याय की आस में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही, इस पीड़िता को बहुजन समाज पार्टी का साथ मिला और बहुजन समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष राजेश सिद्धार्थ सहित बसपा प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित महिला गीता के साथ एसपी से मामले में कार्यवाही को लेकर मुलाकात की।

बहुजन समाज पार्टी के राजेश सिद्धार्थ ने बताया कि, 15 दिन दलित प्रकरण के बीत गए हैं और अब तक दलित विधवा पीड़िता को न्याय नहीं मिला। योगी सरकार में 15 दिन बाद भी दलित को न्याय की दूर-दूर तक आस नहीं दिख रही है। प्रदेश सरकार पर भी हमलावर होते हुए बसपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि, योगी सरकार में दलितों के ऊपर लगातार अत्याचार हो रहे हैं और पुलिस मामले में कोई कार्यवाही नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि, शिक्षा के मंदिर में जातिवाद और सामंतवादी सोच के चलते दलित महिला को अपमानित होना पड़ा। यदि इस मामले में पुलिस ने जल्द क़ानूनी कार्यवाही नहीं की तो बीएसपी प्रदर्शन करेगी। वहीं बीएसपी के नेता जगदीश जाटव ने कहा कि, डालियों के ऊपर अत्याचार बढ़ते जा रहे है। दलित रसोईया को सरेआम अपमानित और धमाकने के मामले में कार्यवाही न होना पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है।

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