अमेठी के संजय गांधी अस्पताल को लेकर चल रही बहस में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का बयान आ गया है। सूबे के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने संजय गांधी अस्पताल पर हुई कार्रवाई को जस्टिफाई करते हुए एक दम सही बताया है। लेकिन डिप्टी सीएम साहब आप और आपका महकमा संजय गांधी अस्पताल को लेकर चाहे जो सोचे समझे। लेकिन एक बार अमेठी की जनता की आवाज को भी सुन लीजिए। अमेठी की जनता सड़क हो या सोशल मीडिया, वह संजय गांधी अस्पताल पर हुई कार्रवाई को लेकर जो सोच रही है। वो योगी सरकार और मोदी सरकार को अच्छा नहीं लगेगा। डिप्टी सीएम साहब भले एक महिला की मौत के बदले अस्पताल को बंद करना जायज करार दे रहे हो। लेकिन अमेठी की जनता जो कह रही है वो 2024 में सांसद स्मृति ईऱानी और भाजपा को महंगा पड़ने वाला है।
क्योंकि संजय गांधी अस्पताल का मामला सिर्फ अमेठी और लखनऊ नहीं दिल्ली तक गूंज रहा है। अमेठी की जनता की ऑन कैमरा आवाज सुनाएंगे। लेकिन उससे पहले जनता की उस हुंकार को सुनिए, जो वह सोशल मीडिया पर लगा रही है। देखिए ये सारे कमेंटस संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस सस्पेंड होने की खबर पर आए है। सैंकड़ों कमेंट है, लेकिन हैरानी की बात है कि, हर कमेंट स्वास्थाय महकमे और सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है। अनिल कुमार लिखते है कि, ये अस्पताल इंदिरा गांधी ने बनवाया था। मोदी बनवाए होते तो नहीं बंद होता। आशु सिंह लिखते है अस्पताल पर ही ताला लगा दिया, राम राज्य। वहीं दिवाकर मिश्रा नाम के यूजर ने तो स्मृति ईऱानी को संजय गांधी अस्पताल पर कारर्वाई का कारण बताते हुए लिखा कि, हार निश्चित है ईरानी की। दिनेश कुमार ने तो सरकार को धो डाला। लिखा कि, बस यही बचा था, खुद बनवा नहीं पाए, बंद करने में लगे है। शुभम जायसवाल लिखते हैं स्मृति ईरानी हार जाएगी। शिवाकंत दुबे ने सरकार को सलाह दी नाम बदल देते अस्पताल चलने देते। वहीं अरविंद कुमार ने लिखा कि, राजनीति है चुनाव आ रहा है। तायबाली अंसारी, पुष्पा सिंह औऱ राजेश श्रीवास्ताव ने लिखा कि, अगर महिला की मौत लापरवाही से हुई तो उसे सजा दो, जिस डॉक्टर या कर्मचारी की गलती हो। अस्पताल पर ताला मारना राजनीति है।
अशोक सिंह ने लिखा कि, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में 64 बच्चों की मौत हुई। उसमें मेडिकल कॉलेज क्यों बंद किया गया। डक्टर कफील पर कार्रवाई क्यों हुई। ऐसे तमाम कमेंट है, जिसके माध्यम से जनता सजय गांधी अस्पताल को बंद करने पर सरकार पर निशाना साधा। जनता ने योगी- मोदी सरकार को तो घेरे में लिया ही लेकिन इल्जाम का असली बम सांसद स्म़ति ईरानी पर फोड़ दिया। प्रेम शंकर ने अपने कमेंटस से सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा कि, कितने अस्पताल हैं, जहां आए दिन लापरवाही से मौत होती है। जिला अस्पताल में तो अक्सर ऐसा होता है। लेकिन उन अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं होती।
अब सवाल ये है कि, जो डिप्टी सीएम बृजेश पाठक संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस को सस्पेंड करना सरकार की उपलब्धि में गिना रहे है। वह पूरे प्रदेश में अस्पतालों की हालत क्यों नहीं सुधार पा रहे। अमेठी के जिस संजय गांधी अस्पताल पर ताला लगा है। वो अमेठी के लोगों का इलाज तब से करह रहा है, जब अमेठी जिला ही नहीं था। 40 सालों से संजय गांधी अस्पताल अमेठी के लिए एक उम्मीद बनकर खड़ा है। उसमें प्रथिदिन 600 से 700 ओपीडी मरीज आते है। तमाम इमरजेंसी मरीजों का क्या होगा। मरीजों को पता है कि जिला अस्पताल में क्या वय्वस्था है। क्योंकि जिस संजय गांधी अस्पताल में लगभग 400 कर्मचारी है। वहीं इतने कर्मचारी तो पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों में नहीं होंगे। एक बार जनता से सुनिए कि, वह संजय गांधी अस्पताल पर ताला लगने पर क्या कह रहे है।
सुना आपने डिप्टी सीएम जिस इल्जाम के तहत अस्पताल को ताला लगाना जायज कह रहे है। वहीं जनता का रिएक्शन कुछ औऱ ही कह रहे हैं। जो डिप्टी सीएम इलाज में लापरवाही पर इतना बड़ा एक्शन लेना सही बता रहे है। वह उस समय कहां चले जाते है। जब जिला अस्पतालों में जिला महिला अस्पतालों में डॉक्टर रिश्वतखोरी के चलते कितने मरीजों की जान दांव पर लगा देते है। सरकारी अस्पताल में नौकरी कर रहे है। डॉक्टर प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन कर जनता को लूटने का खुल्ला खेल खेलते है। मशीनों, दवाइय़ों के आभाव के चलते मरीजों का बुरा हाल होता है। तब स्वास्थ्य महकमा कहां चला जाता है। तब वह 4 दिन में जांच कर अपने डॉक्टर और अस्पताल पर एक्शन क्यों नहीं लेता। संजय गांधी अस्पताल पर एक्शन इसलिए क्योंकि उसे गांधी परिवार का संजय गांधी ट्रस्ट चलाता है।
तमाम लोगों का इलाज गांधी परिवार की वजह से होता है। अब आखिर संजय गांधी अस्पताल बंद होने से अगर किसी मरीज के साथ इलाज के आभाव में कुछ होता है, तो उसकी जिम्मेदार कौन होगा। सीएमओ साहब होंगे, सांसद स्मृति ईऱानी होंगी, डिप्टी सीएम होंगे या सीएम योगी औऱ पीएम मोदी? क्योंकि किसी को उसकी भी जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। आपको बता दें कि, 22 वर्षीय महिला की मौत पर सोनिया गांधी के प्रतिनिधि केएल शर्मा ने दुख जताते हुए आऱोपी को सजा देने की बात कही थी। लेकिन अस्पताल बंद करना कहां तक उचित है? ये आप कमेंट बॉक्स में जरूर बताए…
ब्यूरो रिपोर्ट NTTV BHARAT