उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एसडीएम न्यायिक विनीत कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को एक मामले में नोटिस जारी कर पेश होने को कहा था। जिसको सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। आइए जानते हैं कि एसडीएम कैसे बनते हैं और उनकी कितनी सैलरी होती है।
उत्तर प्रदेश में हर साल PCS की परीक्षा आयोजित करवाई जाती है। जिसमें प्री, मेन्स और इंटरव्यू होता है। इस परीक्षा को पास करने वाले उम्मीदवार ही एसडीएम बनते हैं। एसडीएम बनने के लिए PCS में बहुत अच्छी रैंक हासिल करना जरूरी होता है। अगर रैंक अच्छी नहीं रही, तो एसडीएम से नीचे के पद दिए जाते हैं। इसके अलावा IAS अधिकारी को भी नौकरी की शुरुआत में एसडीएम का पद दिया जाता है।
कितनी होती है सैलरी?
यूपी में एक एसडीएम की सैलरी शुरुआती ग्रेड वेतन 5400 होती है जो कि पे बैंड 9300-34800 के तहत होती है। यह पे ग्रेड वेतन स्तर लेवल 10 है। एसडीएम का शुरुआती बेसिक वेतन 56,100 रुपये होगा (सभी भत्ते और कटौतियों को छोड़कर)। भारत में एक एसडीएम अधिकारी का अधिकतम (उच्चतम) मासिक वेतन 1,77,500 रुपये (बिना किसी पदोन्नति के) है, लेकिन सर्वोच्च पदोन्नति के मामले में, एक एसडीएम का अधिकतम मासिक वेतन 2.5 लाख रुपये/माह होता है । 7वें वेतन दिशानिर्देशों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, एमपी, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखंड में एसडीएम को वेतन दिया जाता है।
एसडीएम को मिलने वाली सुविधाएं
एक एसडीएम को सरकारी आवास, सुरक्षा गार्ड, माली और रसोइया जैसे घरेलू सहायक, एक सरकारी वाहन, एक टेलीफोन कनेक्शन, मुफ्त बिजली आदि। इसके अलावा, आधिकारिक यात्राओं के दौरान उच्च श्रेणी के सरकारी आवास मिलता है।
एसडीएम किन किन कार्यों को करते हैं?
एसडीएम के पास राजस्व कार्य, चुनाव आधारित कार्य, विवाह पंजीकरण, रजिस्ट्रेशन, ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण करना और जारी करना, शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण और जारी करना, ओबीसी, एससी/एसटी और डोमिसाइल जैसे प्रमाणपत्र जारी करना।