क्या आप जानते हैं कलावा बांधने के पीछे का रहस्य!

क्या आप जानते हैं कलावा बांधने के पीछे का रहस्य!

एनटीटीवी: हिंदू धर्म में कोई धार्मिक अनुष्ठान हो, पूजा-पाठ हो या कोई मांगलिक कार्यक्रम हो, सभी शुभ कार्यों में हाथ की कलाई पर लाल धागा यानी कलावा बांधने की परंपरा है। पुरुष हो या स्त्री बच्चा हो या बूढ़ा हर किसी की कलाई पर कलावा बांधने का विधान है। शास्त्रों में तो कलावा बांधने का अपना एक अलग ही महत्त्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कलावा यानी रक्षा सूत्र बांधने का वैज्ञानिक महत्व भी है ।

कलाई पर मौली यानी रक्षा सूत्र बांधने के पीछे धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्त्व भी है। पूजा के समय हाथों में लाल या फिर पीले रंग का बांधे जाने वाला कलावा, कच्चे सूत के धागे से बना होता है। शास्त्रों के अनुसार कलावा बांधने की परंपरा की शुरुआत देवी लक्ष्मी और राजा बलि ने की थी। कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने से जीवन पर आने वाले संकट से रक्षा मिलती है।  कहा जाता है कि कलावा बांधने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा प्राप्त होती है। इससे उनकी कुंडली में गुरु बृहस्पति मजबूत होता है। व्यक्ति के जीवन में सुख-संपन्नता आती है।

कलावा बांधना वैज्ञानिक तौर पर काफी लाभकारी

विज्ञान के अनुसार कलावा स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। शरीर के कई हिस्सों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुजरती है। कलाई पर कलावा बांधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित रहती है। इससे त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ का सामंजस्य बना रहता है। कलावा बांधने से रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों से काफी हद तक बचाव करता है।