शनि के दुष्प्रभाव से बचा सकते हैं ये उपाय, विधि-विधान से करें पूजन

शनि के दुष्प्रभाव से बचा सकते हैं ये उपाय, विधि-विधान से करें पूजन

सौरमंडल में सूर्य और बृहस्पति के बाद शनि का नंबर आता है। सूर्य की तरह शनि भी उदय-अस्त होता है। जब भी शनि उदय होता है तो धरती पर उसका गहरा असर होता है। धरती के सभी लौह अयस्क, तेल और काला पत्थर पर शनि का प्रभाव रहता है। यह माना जाता है कि शनिदेव मनुष्य को उसके पाप और बुरे कार्यों आदि का दंड प्रदान करते हैं। शनि के बुरे प्रभाव से धन-संपत्ति और मनुष्य के शरीर पर असर पड़ता है।

ऐसे ही जब कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो समझ लीजिए की बुरा वक्त शुरू हो गया है। शनि के प्रभाव में आए जातकों का शनि फौरन न्याय करता है। अनिष्ट शनि ग्रह के प्रभाव से बचने के लिए कुछ खास उपाय कर इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

जी हां शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए संध्या के समय हनुमान चालीसा का पाठ करें और पवनपुत्र को बेसन के लड्डू का भोग अवश्य लगाएं। काली गाय की सेवा करने के साथ-साथ करें और हर शनिवार को गौ माता के मस्तक पर रोली लगाकर सींगों में कलावा बांध कर धूप करें। इसके बाद परिक्रमा करके गाय को बूंदी के चार लड्डू खिलाएं।

इसके साथ ही शनिवार को व्रत रखने से और भगवान हनुमान की पूजा करने से प्रभाव कम होता है। सूर्यास्त से पहले वट या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इस दिन बंदरों को केला, गुड़ और काले चने खिलाए। ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होंगे और जातक इसके बुरे प्रभाव से काफी हद तक बच सकेंगे।

खाना खाने से पहले थोड़ा अग्रासन जरूर निकालें और कौओं को खिलाएं। राई का तेल या तिल का तेल दान करें। सुरमें की जली लेकर जमीन में गाड़ दें। इतना ही नहीं रात को सोते समय दूघ न पिएं।