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शब्द के कई अर्थ…!

शब्द के कई अर्थ!

कहते है ना कि अधिक से अधिक शब्दों के उच्चारण से व्यक्ति की भाषा के बारे में अनुभव हो जाता है…

वही लोग ना जाने कितने बार कहना कुछ चाहते है और जाने –अनजाने कहा कुछ और देते है।  और एक बार मन में ये बात बैठ जाए तो आसानी से दूर नहीं होती। चाहे फिर हम ईश्वर से प्रार्थना करे या फिर गुस्सा करके अपनी बात दुबारा समझाए। या फिर अपनी गलती की माफी मांग ले, लेकिन फिर भी कही ना कही उन शब्दों के गहराई लोगों को दिलों में रह जाती है।  इसलिए लोगों को कहने से पहले शब्दों की गहरी और उसके अर्थ को अच्छे से समझना चाहिए। क्योकि मन, दिल और दिमाग का कुछ पता नहीं होता, ना कब वो उन शब्दों को अपने दिलों में एक विशेष जगह दे देते है। और कहे गए व्यक्ति के खिलाफ अपने अंदर घृणा, कोध पनापने लगते है। और ना जाने कब उन शब्दों की जगह खमोशी ले लेती है। क्योंकि हम उस बोले व्यक्ति के शब्दों के अर्थ के बारे में उसकों नहीं बता पाते।

और वही कहा भी गया है कि

शब्द सिसक़ रहे, अर्थ कह रहे हाहाकार

शब्द खमोश है कही अन्तर्गन करे चित्कार